मै नहीं हूँ...|

मै नहीं हूँ मेरी यादों से लिपट करके रोए हो 
     मेरी तस्वीर के आगे बैठ करके रोए हो |
गैर कहते ही रहे मुझको हर पल तुम तो 
     मै नहीं हूँ मेरे साये को देख करके रोए हो |

तेरी खुशिओं में सजी है महफ़िल फिर तो 
    जशन- ए-रात की तन्हाई में सिमट करके रोए हो |

 मेरे दिल को जला कर हुई तसल्ली तुमको
      अश्क आँखों में समेटे जी भरके रोए हो |

मै थी जिंदा थी तेरी पर तू नहीं मेरा 
मेरी तस्वीर को सीने से लगा करके रोए हो |

मेरे दिल में खुदे थे नक्श तेरे 
    अपनी नफरत को बहुत देर बता करके रोए हो |
जब तलक थे हम हजारों गिले थे तुम्हे 
    अब नही हूँ इश्क बलिस्तों से नाप करके रोए हो |
"निमिशा" लिखती ही रही खुद की ग़ज़ल तुम पर 
         नहीं है वो ये अफसाने दुहरा करके रोए हो |

3 comments:

sunil shukla September 27, 2011 at 1:16 AM  

very nice..............

sunil shukla October 5, 2011 at 2:15 AM  

Ghazlon me tere ishq ka churcha na karenge
Hum tujh ko yuon sar-e-aam ruswa na karenge
Kyon hum peh uthaye sang-e-malamat ki faisle
Behtar hai tere shehar mein hum aaya na karenge
Yeh chaand yeh taare ye haseen raat ka aalam
Munsoob tere naam se kya kya na karenge
Wiraan huye qasr-e-tamana ke dareeche
Aabaad kabhi pyar ki ab duniya na karenge
Har cheez ki bohtaat mein nuqsaan bahut hai
Shiddat se kisi shakhs ko chaha na karenge…

sunil shukla October 5, 2011 at 2:18 AM  

Saza Pe Chhod Diya, Jahaa Pe Chhod Diya..
Her Ek Kam Ko hum Ne Khuda Pe Chhod Diya !!

Wo Hum Ko Yaad Rakhe Ya Phir Bhula De..
Usi Ka Kaam Tha, Us Ki Raza Pe Chhod Diya !!

Ab Us Ki Marzi Bhujha De, Ya Jala De..
Chirag Hum Ne Jala Ke Hawa Pe Chhod Diya !!

Aab Us Se Baat Kiye Bagair Kaise Rehenge Hum..
Ye Masla Dua Ka Tha So Dua Pe Chhod Diya !!

Is Liye To Wo Kehte Hain Dewana Hum Ko..
Ki Hum Ne Sara Zamana Wafa Pe Chhod Diya !!

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"निमिश"

"निमिश" अर्थात पल का बहुत छोटा हिस्सा जितना कि लगता है एक बार पलकों को झपकने में | हर निमिश कई ख़याल आते हैं, हर निमिश ये पलकें कई ख़्वाब बुनती हैं | बस उन्ही ख़्वाबों को लफ्जों में बयान करने की कोशिश है | उम्मीद है कि आप ज़िन्दगी का निमिश भर वक़्त यहाँ भी देंगे | धन्यवाद....