जो रुला न दे मेरी नामौजूदगी आज तुमको,
                 तो कहना कि हम असल में शायर नहीं यारों ।


मेरा अक्श नहीं है उस महफ़िल में तो क्या,
                   न कहना कि हम वहाँ हाज़िर नहीं यारों।

मेरी नब्ज़ चलती रहेंगी जब तलक भी,
                   ये हरफ़ पेश करेंगी शायरी तब तलक ।

यहाँ बैठी हूँ तनहा तो बेख़ौफ़ न होना,
                   न सोचना कि "शिप्रा" का साहिल नहीं यारों ।

1 comments:

sunil shukla February 27, 2012 at 10:16 PM  

VERY NICE line.......न सोचना कि "शिप्रा" का साहिल नहीं यारों ।

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"निमिश"

"निमिश" अर्थात पल का बहुत छोटा हिस्सा जितना कि लगता है एक बार पलकों को झपकने में | हर निमिश कई ख़याल आते हैं, हर निमिश ये पलकें कई ख़्वाब बुनती हैं | बस उन्ही ख़्वाबों को लफ्जों में बयान करने की कोशिश है | उम्मीद है कि आप ज़िन्दगी का निमिश भर वक़्त यहाँ भी देंगे | धन्यवाद....